Thursday, 5 September 2019
Sunday, 1 September 2019
बूढ़ी माँ दर्द
अल्फ़ाज़ बूढ़ी माँ के अब लब पे ठहर गए,
आते नहीं क्यूँ लौटकर , जो हैं शहर गए।
आया शहर से ख़त तो थी रुख़सार पर नमी
क्या ख़ैरियत से हो तुम ? जाने किधर गए।
मेरी परवरिश में कोई कमी रह गयी थी क्या
पूछा न हाल-ए -दिल मेरा जबसे शहर गए।
आँचल की मेरे छाँव में तुम , दिन रात थे महफ़ूज़
मगर इस शौक-ए-आलम से,तेरे जज़्बात मर गए।
Thursday, 29 August 2019
Tuesday, 13 August 2019
आसमाँ छूने की ख़्वाहिश
आसमाँ छूने की ख़्वाहिश,हो अगर जज़्बात में
चाँद देगा रोशनी ,काली अंधेरी रात में ।।
सर झुका देंगे फ़रिश्ते ,आकर तेरी दहलीज़ पर
लफ्ज़ ऐसे हों कि दिल,बिक जाए तेरी बात में।।
चन्द रिश्तों से सजा,दामन सितारों की तरह
नूर बनकर आ गए,कुछ दोस्त यूँ सौगात में।।
जाने किस उम्मीद में ,जीते रहे सब उम्र भर
हो गयी पूरी वो ख़्वाहिश,आगोश-ए-वफ़ात में।।
चाँद देगा रोशनी ,काली अंधेरी रात में ।।
सर झुका देंगे फ़रिश्ते ,आकर तेरी दहलीज़ पर
लफ्ज़ ऐसे हों कि दिल,बिक जाए तेरी बात में।।
चन्द रिश्तों से सजा,दामन सितारों की तरह
नूर बनकर आ गए,कुछ दोस्त यूँ सौगात में।।
जाने किस उम्मीद में ,जीते रहे सब उम्र भर
हो गयी पूरी वो ख़्वाहिश,आगोश-ए-वफ़ात में।।
Tuesday, 6 August 2019
Subscribe to:
Posts (Atom)


