Sunday, 1 September 2019

बूढ़ी माँ दर्द


अल्फ़ाज़ बूढ़ी माँ के अब लब पे ठहर गए,

               आते नहीं क्यूँ लौटकर , जो हैं शहर गए।

आया शहर से ख़त तो थी रुख़सार पर नमी

               क्या ख़ैरियत से हो तुम ? जाने किधर गए।

मेरी परवरिश में कोई कमी रह गयी थी क्या

               पूछा न हाल-ए -दिल मेरा जबसे शहर गए।

आँचल की मेरे छाँव में तुम ,  दिन रात थे महफ़ूज़

          मगर इस शौक-ए-आलम से,तेरे जज़्बात मर गए।

Thursday, 29 August 2019

ग़म न कर


जूझने के हौसले को कम न कर
उम्र तेरी ढल  रही है ग़म न  कर।

ये तेरी  पेशानी  की  गहरी  लकीरें
है तज़ुर्बे ए शख़्सियत तू गम न कर।

याद करके माज़ी को अफ़सोस क्यूँ है
आज तो ख़ुशियाँ मना ले ग़म न कर।

Tuesday, 13 August 2019

आसमाँ छूने की ख़्वाहिश

आसमाँ छूने की ख़्वाहिश,हो अगर जज़्बात में
चाँद  देगा   रोशनी ,काली  अंधेरी   रात में ।।

सर झुका देंगे फ़रिश्ते ,आकर तेरी दहलीज़ पर
लफ्ज़ ऐसे हों कि दिल,बिक जाए तेरी बात में।।

चन्द रिश्तों से सजा,दामन सितारों की तरह
नूर बनकर आ गए,कुछ दोस्त यूँ  सौगात में।।

जाने किस उम्मीद  में ,जीते  रहे सब उम्र  भर
हो गयी पूरी वो ख़्वाहिश,आगोश-ए-वफ़ात में।।

Tuesday, 6 August 2019

बधाई मेरे देश


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लहरायेगा  प्यारा   तिरंगा
अब कश्मीर  की  घाटी में।
फूल ,कली,तन-मन चहकेंगे
स्वर्ग  सी सुन्दर  वादी   में।।

हर्षित ,पुलकित ,आनंदित 
जन -जन का मन हर्षाया है।
हुआ अखण्ड ये भारत अपना
जिसे  देख  शत्रु थर्राया  है।।

Monday, 29 July 2019

शिव आराधना

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पढ़िये भगवान शिव के सोलह पवित्र नामों से युक्त शिव की आराधना


करती हूँ गुणगान मैं भोले 
शम्भू ,शंकर  नाथ  की।
वेदों  और  पुराणों  में है
महिमा  महाकाल  की।।

सृष्टि सृजन के आदि स्रोत
ये  ज्योतिष  के  आधार हैं।
सौम्य  प्रकृति  व रौद्र रूप
लय-प्रलय  महासंहार  हैं।।

शशिशेखर ,शिव एक तपस्वी
गले  वासुकि   की   माला।
भस्म लेप श्रृंगार है अतिप्रिय
पिए हलाहल  विष  प्याला।।

पति परमेश्वर आदिशक्ति के
नीलकण्ठ    हैं   धारी ।
हुआ वियोग सती माता का
किया   तांडव  भारी।।

वज्र, कृपाण, पाशु हैं आयुध
पशुपति,  कैलाशी  शिव के।
ज्ञान ,साधु , वैराग्य , त्याग,
कइ रूप कपर्दी ,गिरिप्रिय के।।

मंत्र-ध्यान प्रिय बिल्वपत्र से
मोक्ष मार्ग खुल जाता है।
मृत्युंजय के नाम मात्र से
पाप -दोष  धुल जाता है।।

हे !सुरसूदन , हे! परशुहस्त
ये भेंट मेरी स्वीकार करो।
शाश्वत सत्य देव अज रूपी
तारक  अंगीकार  करो।।
             
                  ।। अर्चना द्विवेदी।।
फ़ोटो:साभार गूगल
एक प्रयास अपनी बोली अवधी में पढ़िए-
कजरी